Sunday, August 9, 2015

बहुत भीड़ है इस महुब्बत के शहर मैं.....

मैंने तुझे शब्दों में महसूस किया हैलोग तो तेरी तस्वीर पसंद करते हैं ..!!!


टकरा जाता हूँ अक्सरमैं तेरे साये सेतुम दिखते जब नही हो तोमहसूस क्यों होते हो मुझे..!!


बेवजह हो गयी तुमसे इतनी मुहब्बतचलो अब वजहभी बन जाओ जीने की...!!


उज़ड़ जाते है सर से पाव तक वो लोगजो किसी बेपरवाह से बे-पनाह मोहब्बत करते है..!!

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