लहरो से हताश है नौका फिर भी तू चलता जा,
बहुत रंग बदलती है दुनिया तू भी रंग बदलता जा।
पिघल रही है ये शमा-ए-जिन्दगी शाम-ओ-सहर,
बहता चल हवा के संग तू भी थोड़ा पिघलता जा।
बहलाती है दिल सबका दुनिया भर की चकाचौंध,
अपनी मस्ती मे नाच तू दिल बनकर बहलता जा।
बहुत रोड़े आएंगे तेरी कामयाबी की राहो में,
जीत कर हर बाधा को तू मुसीबतों को निगलता जा।
ख्वाहिश-ए-दुनिया है कि तु शमा बनकर बुझ जाए,
बना दे मशाल खुद को "अभि" पहरो-पहर जलता जा।
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